तू सोच कर के सोच ले
तेरी सोच कितनी विशाल है ,
जो तू सोचता , वह तेरी सोच है ,
वाह! तेरी सोच की क्या बात है ??

जैसी सोच की सच्चाइयां
दबाती है सोच बुराई की
तेरी सोच में है दम बहुत
ये मैं सोच के हु कह रहा।

कौन सी वह चीज है
जो बढ़ाती तेरी सोच को
क्या सीमा है तेरी सोच की
जिस सोच को ना , कोई रोक सका ।

अच्छा यह बताएं आप भी
क्या सोचते थे आप मेरे बारे में
यह मुझे ना पता….
पर मैं आपकी सोच की तारीफ
किस दिल से कहा करू ?

आप सबकी सोच तो
किसी सोच को कुर्बान है
पर वह सोच को मैं क्या कहूं ?
जो किसी के सोच पर मेहरबान है।

छोटे कद का सोच भी
सोचता है बहुत कभी
नाम को वो नाम से न
सोच से फैला रहा
दूसरों की सोच पर वो
अपना सोच बना रहा !!

तू सोच कर के सोच ले
तेरी सोच कितनी विशाल है ,
जो तू सोचता , वह तेरी सोच है ,
वाह! तेरी सोच की क्या बात है ??


यु जिंदगी में रंग खूब देखे मैंने ,
पर असलियत में रंगों से हिसाब थोड़ा बाकी है ।

जिंदगी में सबके , मैं रंग भरना सिख गया ,
पर अब भी कुछ मीठा ऐहसास लाना बाकी है ।

रंग बिरंगी कलमों से खूब लिखी बातें दिल की ,
पर अब भी अपनी लेखनी से जीवित ऐहसास जगाना बाकी है।

ख़ूबसूरत बादियों में निकली रंग – बिरंगी तितलियां ,
इंद्रधनुष के जैसे जिंदगी में कुछ निखार लाना बाकी है ।

यु जिंदगी में रंग खूब देखे मैंने
पर असलियत में रंगों से हिसाब थोड़ा बाकी है |


एक सवाल मरता ही नहीं
आखिर बेटियां ही क्यों मारी जाती है,
लक्ष्मी के घर आने पर
यु रिश्तों की लकीरें क्यों मिट जाती है,
बदल रही सोच समाज की
फिर ये काली सोच कहा थी छूट गयी
चार दिनों की जिंदगी में
रिस्तों की डोर कहा से टूट गयी
संस्कारो की वो ग्रन्थ पुस्तिका
आखिर कोई पढ़ता क्यों नहीं
अब ये सवाल कोई करता क्यों नहीं
एक सवाल मरता ही नहीं
आखिर बेटियां ही क्यों मारी जाती है।


यु अकेले रह गया हूं
अपनों के बीच में
सब खुद को व्यस्त दिखाने में
अपनों को ही भुला दिए
चंद शब्दों की जरुरत थी
उन्हें कुछ कहने को
पर शब्द कीमती हो गए
रिश्ते सारे यु ही खो गए
किस-किस को जोर दू
बात करने को प्रभु
दिल से दिल के रिश्ते थे
अब सब रिश्ते यु ही खो गए
यु अकेले रह गया हूं
अपनों के बीच में


नीरस मेरी कविता
जिसमें कोई रसधार नहीं
मनमोहन की वो शक्ति न
मनमोहित हो वो विचार नहीं
शब्दों का वो जादू न
जो फूलों को महका जाए
वो सुगंधित इत्र की धार नहीं
जो रोम-रोम में वस् जाए
वो लिखित प्रयास में गहराई न
जो दिलों की गहराई में छप जाए
नीरस मेरी कविता
जिसमें कोई रसधार नहीं
मनमोहन की वो शक्ति न
मनमोहित हो वो विचार नहीं


वो आँखों में एक सपने है
वो सपनों में है ख़ाब बड़े
नदियों से लेकर झरनों तक
वो इंद्रधनुष सा संसार बने
वो फूलों को महकाने का
जो इत्र सुगंधित ले आए
वो पंछियों के चहचहाने को
जो मीठी वाणी दे आए
जो सा रे गा मा…. सरगम को
जो सात सुरों में बांध गए
सूर्य की वो ज्योति जो
अंधेरे को भी छाट गए
जीवन ज्योति पौधों में
जो संजीवनी बुटी बाट गए
दिलों की वो सच्चाई जो
बुराई का भी नाश किया
माता की ममता को जो
देवों के ऊपर स्थान दिया
जो भाई-बहन के रिश्ते को
एक पवित्र सूत्र में बांध दिया
जो पिता को एक दोस्त बना
एक मंज़िल को जीवन में छोरा है
वो संसाधन पुरे है
बस मेहनत करना थोड़ा है
जो सपने देख रहे है अब
अब ख़ाबो को पूरा कर जाओ
कुछ नाम बना लो अपना भी
जीवन में एक ज्योति बन जाओ।


आज हार गया हूं मैं
कल फिर लौटकर आऊंगा
आज आंसू इन आँखों में थी
कल ख़ुशी दे कर जाऊंगा
भीड़ बैठी सामने होगी
तारीफ़ देती तालिया
सिर्फ़ बात उसकी हो रही
जिसने ये मुक़ाम फ़तह पा लिया
मैं हारा था उस दिन
आज जीत की मुक़ाम हैं
आज फिर हार गया तो क्या
कल फिर जीत कर आऊंगा
कल फिर लौट कर आऊंगा


वो सपनों में आज मैंने
नदियों के पार जाने को सोचा
समुंदर की गहराई में
छलांग लगाने को सोचा
ईटो की दीवारें न ,
रेत की बनाने को सोचा
अपने छोटे-छोटे से महलों को
स्वर्ग बनाने को सोचा
बादलों पर बैठ कर
ज़रा , सैर लगाने को सोचा
हर एक नगर में,
हर एक दिलों से
बात करने को सोचा
उड़ते-फिरते परिंदों से,
गुफ़्तगू करने को सोचा
हर बार जनम ले,
हर एक जनम में
कुछ कर गुज़रने को सोचा
वो सपनों में आज मैंने
नदियों के पार जाने को सोचा


कड़ी मेहनत कर पहुँचते
इस मुकम्मल मुकाम तक
वो रास्ते थे खोखले
जिन रास्तों पर वो चले
धुप, गर्मी की न चिंता
ठंड का न ऐहसास था
मंजिलों तक पहुँचने का जज़्बा
यही उनमें खास था
कुछ आस था ,
सबका प्यार उनके पास था
जितने का जज़्बा यही उनमें खास था
खाली पेट, कम सो कर
जिन्होंने अपनी जिंदगी गुजारी
सफ़ल होने पर सफलता
तभी उनके हाथ थामी
जोड़-जोड़ कर पैसे
जिन्होंने अपनी किस्मत को बनाया
भाग्य के उस लेख को जिन्होंने
अपनी सच्ची निष्ठा से सजाया
कर मेहनत अभी भी तू
हार कर न बैठ जा
जीत का तू सपन देख
राह खुद बन जायेगा
नाम तू बनाएगा
सबको तुझ पर विश्वास है
तू कुछ जरूर करके दिखलायेगा।


अभी कुछ बातें राज़ है
उसे राज़ ही रहने दो
परदे गिरी है कुछ बातों पर
अभी सच्चाई को भी ढ़कने दो
बड़ी करबाहट है
उन बातों को बताने में
अभी कुछ समय और
मिठास से जिंदगी भरने दो
अभी कुछ बाते राज़ है
उसे राज़ ही रहने दो |


चार दिनों की जिंदगी में
खुशियों को भर कर लाओ
नकारात्मकता की सीढ़ी पर
न तुम चढ़ते जाओ
सोच सोच कर तुम न
जिंदगी के पल बेकार करो
छोड़ के चिंता अपने चेहरे पर
एक अच्छी सी मुस्कान भरो
बस दिलो में प्रेम भर कर
सबसे प्यार करो
बस प्यार करो ।


झूठी शान देख अपनी
मैं हँस रहा हर रोज था
पर जेब खाली थी हमारी
तब भी दिल में थोड़ा संतोष था
आज है न एक पैसा
हो सके तो कल जरूर आएगा
समय खास इतिहास के लिए
अपना टाइम आएगा
अपना टाइम जरूर आएगा
Apna Time AAyega


Main Sanjivani Ban Jaunga
दोस्ती समुन्दर है तो
मैं उसकी गहराई बन जाऊंगा
जब आप अकेले पर जाओगे
तो मैं आपका साया बन कर आऊंगा
जब भूल रहे होंगे, सब आपको
तो यादों की संदूक दे जाऊंगा
पत्थर वाले लोगों के दिलो में
आपके लिए मोम की बत्ती मैं जलाऊंगा
हाथों की बिगड़ी रेखाओं को
नई किस्मतों से सजाऊंगा
ये दोस्त का वादा है आपको
उदासी भरी चेहरो पर
संजीवनी बन कर आऊंगा
मैं संजीवनी बन जाऊंगा


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